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"जीव हत्या और मासाहार भोजन सही या गलत"

 "जीव हत्या और मासाहार भोजन सही या गलत"



प्रकृति की हर प्रजाति एक जीव है, जिसमे मानव भी आता है, और प्रकृति का हर जीव किसी अन्य जीव पर ही निर्भर करता है, धरती पर कुछ जीव अन्य जीव को खा कर गुजारा करते हैं और कुछ शाकाहारी भोजन खाते हैं, जो जीव मासाहारी भोजन खाते हैं उन्हें प्रकृति ने ऐसा ही बनाया है और वो अन्य जीव के दर्द को समझने में भी सक्षम नहीं हैं, पर दूसरी और अगर मानव को देखा जाए तो वो दुसरो के दर्द को महसूस कर सकता है, पर ये बात भी सत्य है की धरती पर पैदा हुये हर जीव को अपने बारे में सोचने का पूरा अधिकार है, जीव हत्या मानव के लिए सही है या गलत वो ईस बात पर निर्भर करता है की वो दूसरा जीव मानव के लिए खतरनाक कितना है, जैसे हम एक मच्छर को, एक कॉकरोच को बिना सोचे समझे मार देते हैं क्योंकि हमे पता है की हम नहीं मारेंगे तो वो हमारे लिए नुकसानदयाक होगा, पर वही दुसरी और हम एक कुत्ते बिल्ली आदि को नहीं मारते क्यूंकि वो हमारे लिए नुकसानदयाक नहीं है,अगर हम शेर की बात करें तो हम उसे भी नहीं मारते हैं क्योंकि हमारे पास उसके लिए भी एक विकल्प है "जंगल", ये बातो से साफ है की जब तक दुसरा जीव हमारे लिए नुकसानदयाक नहीं है और उसे जीवित रखने के लिए हमारे पास विकल्प उपलब्ध है, तो जीव की हत्या करना गलत है


"मासाहार सही या गलत"


वैसे तो हर वो जीव को हम खा सकते हैं जिसको खाने का अधिकार हमारा देश हमे देता है, जैसे हम एक मुर्गे को मार के हम खा सकते हैं पर एक हिरण को मार कर नहीं, पर फिर भी मैं कहूंगा की मासाहार गलत है,मेरे गलत कहने का आधार ये बिलकुल नहीं है की हमें उसका पाप लगेगा या कोई ऊपर बैठी शक्ति हमें दंड देगी, ऐसा बिलकुल नहीं है, मैं मासाहार को इस्लिये गलत ठेहराता हूँ, क्युकी ये एक तरह का साइन है उस व्यक्ति को समझने का जो मासाहार का सेवन करता है, ये साइन है उस बात का कि मासाहार खाने वाला व्यक्ति एक दुसरे जीव के दर्द को समझने में उतना सक्षम नहीं है जितना एक शाकाहारी व्याक्ति है जो व्यक्ति एक जीव को मार कर खा रहा है उस से ये बात साफ है कि वो अपने बारे में ज्‍यादा सोचता है, उसे दुसरे के दुख से इतना ज्यादा मतलब नहीं है, तो ऐसा व्यक्ति कभी खुद के मुसीबत आने पर एक दूसरे मानव के लिए भी खतरनाक हो सकता है, इसलिये मेरे हिसाब से मासाहार एक गलत पसंद है..🙏🙏🙏🙏

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