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ज्वालादेवी की लौ जिसे हमारे देश वाले चमत्कार मानते है, ये सिर्फ हमारे देश मे नहीं और देशों में भी है


 ज्वालादेवी की लौ जिसे हमारे देश वाले चमत्कार मानते है, ये सिर्फ हमारे देश मे नहीं और देशों में भी है पर दूसरे देशों में इसको चमत्कार का नाम नही दिया गया क्योंकि लोग सच जानते है।



उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क के चेस्टनेट रिज काउंटी पार्क में एटरनल फ्लेम फाल्स नामक झरना। यहां भी पानी के बीच ज्वाला जलती है, पर लोग इसको पूजते नहीं, क्योंकि जानते है धरती में मौजूद मीथेन गैस के रिसाव के कारण आग जलती रहती है।


ज़मीन से तेल और गैस निकालने वाली कंपनियां जैसे ongc, iocl आदि जब समुद्र से तेल या गैस निकालते है तो समुद्र के बीच मे भी ऐसी ज्वाला जलती नज़र आती है। 


पशु या पेड़-पौधे जो मिट्टी में दब जाते है, वो धीरे-धीरे हाइड्रोकार्बन में टूटते है और जीवाश्म ईंधन या फॉसिल फ्यूल में बदल जाते है। जैसे कोयला, मीथेन, प्राकृतिक गैस आदि। इसके अतिरिक्त हिमालय के निचले भाग जहां मंदिर है वहां ऐसे ईंधन ज्यादा होते है।


ज्वाला देवी की लौ भी धरती से रिसने वाली मीथेन या कोई अन्य ज्वलनशील गैस के कारण है जैसे प्राकृतिक गैस (NPG)।


आप रसोई घर की LPG गैस पर आश्चर्य नही करते क्योंकि सच जानते है कि सिलिंडर में जो गैस है, वही जलती है। वैसे ही ज्वाला देवी है। बस धरती के अंदर भरी गैस आपको दिखती नहीं।


अगर आप अपने रसोई घर की LPG गैस किसी आदिवासी इलाके में ले जाओ जहां लोग LPG गैस के बारे में लोग कुछ न जानते हो और आप उन्हें चमत्कार बता कर गैस उनको जला कर दिखा दो, तो वो भी LPG गैस को चमत्कार मान उसकी पूजा करने लगेंगे, जैसे लोग ज्वाला देवी की करते है।


आयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ongc) ने साफ कहा है कि जहां ज्वाला जल रही है वहाँ ज्वलनशील गैस का भंडार है लेकिन खुल कर इसकी बात नही होती क्योंकि वो धार्मिक स्थल है और बहुत से धार्मिक दर्शन के लिए आते है।


भृम टूट जाएगा, वोटों की राजनीति खतरे में पड़ जाएगी, इसलिये ज्वालादेवी की लौ क्यों जल रही है? कोई बताता नही। अंध्विश्वास को बनाये रखना भी जरूरी है नहीं तो बेवकूफ लोगो का उधर आना बंद हो जाएगा और कमाई भी।

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