Skip to main content

CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान के भाषण पर विवाद

khushboochouhanजवाब

By_Bheemarmyno1news
नई दिल्ली, 

इसी प्रतियोगिता में दिया गए एक और भाषण का वीडियो सामने आया है, जिसमें असम रायफल्स में रायफलमैन बलवान सिंह भी इसी मुद्दे पर बोल रहे हैं. लेकिन उनके तर्क पूरी तरह से अलग हैं और अपने संबोधन में कहा कि बहादुरी मारने में नहीं किसी को बचाने में है.

‘बहादुरी मारने में नहीं बचाने में': खुशबू चौहान को असम रायफल्स के जवान का जवाब
खुशबू चौहान Vs बलवान सिंह
  • CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान के भाषण पर 
  • मानवाधिकार नियमों को दिए तर्क पर विवाद
  • अब सामने आया जवान बलवान सिंह का वीडियो
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के द्वारा 27 सितंबर को आयोजित किए गए मानवाधिकार पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में दिए गए CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान के भाषण ने काफी सुर्खियां बटोरीं. उनके भाषण पर एक बहस भी हुई, किसी ने तारीफ की और किसी ने आलोचना. इसके बाद में CRPF को सफाई भी देनी पड़ी. अब इसी प्रतियोगिता में दिया गए एक और भाषण का वीडियो सामने आया है, जिसमें असम रायफल्स में रायफलमैन बलवान सिंह भी इसी मुद्दे पर बोल रहे हैं. लेकिन उनके तर्क पूरी तरह से अलग हैं और अपने संबोधन में कहा कि बहादुरी किसी को मारने में नहीं बल्कि बचाने में है.
अब सोशल मीडिया पर बलवान सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है, इस भाषण में उन्होंने मानवाधिकार नियमों का पालन किए जाने की वकालत की. अपने संबोधन में बलवान सिंह कहते हैं कि कहा जाता है कि मानवाधिकारों का अनुपालन कर पाना असंभव है, लेकिन आम लोगों के अधिकारों की रक्षा आखिर करेगा कौन?
इस प्रतियोगिता में हर कोई अपने तर्कों से सामने वाले को हराने में लगा था, ऐसे में उनके इस बयान को खुशबू चौहान के तर्कों का जवाब माना जा सकता है.
‘बहादुरी किसी को मारने में नहीं...’
बलवान सिंह ने कहा, ‘मानवाधिकार वो अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को मिलते हैं, अलग से भारत का संविधान भी नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है. आतंकवाद-नक्सलवाद वाले स्थानों पर शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षाबलों को तैनात किया जाता है, लेकिन ये भी सच है कि मानवाधिकार आयोग आवाज़ वहीं उठाता है जहां पर इनकी अनदेखी होती है.’
असम रायफल्स के जवान ने कहा कि साल 2000 से 2012 तक मणिपुर में पुलिस-सुरक्षाबलों में 1000 फर्जी मुठभेड़ दर्ज हुईं. देश में 2016 में पुलिस फायरिंग में 92 नागरिक मारे गए, लाठीचार्ज में भी कई लोगों की मौत. बहादुरी किसी को मारने में नहीं बचाने में होती है, अगर बम-बंदूक के दम पर शांति स्थापित होती तो कश्मीर-छत्तीसगढ़ में शांति हो गई होती.
जवान बलवान सिंह ने अपनी स्पीच में कहा कि क्रोध को क्रोध से नहीं प्यार से जीता जाता है, अब्राहम लिंकन ने भी गृह युद्ध खत्म करने के लिए दुश्मन को प्यार से जीतने की बात कही थी. असली जंग लोगों के दिल में लड़ी जाती है, इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन कर नहीं बल्कि इनका सम्मान करके जीता जा सकता है. क्योंकि जहां मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है वहां ही पान सिंह तोमर को डाकू बनना पड़ता है.
पूरा भाषण यहां सुनें:
खुशबू चौहान ने क्या कहा था?
इसी प्रतियोगिता में खुशबू चौहान ने एक भाषण दिया, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी. उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि उठो देश के वीर जवानों, तुम सिंह बनकर दहाड़ दो, एक तिरंगा उस कन्हैया के सीने में गाड़ दो. इसी भाषण पर काफी बहस हुई तो CRPF ने सफाई देकर कहा कि हम मानवाधिकार का समर्थन करते हैं, लेकिन ये भाषण वाद-विवाद में दिया गया था इसलिए इससे ऑफेंड ना हों.

Comments

Popular posts from this blog

साइमन कमीशन पर एक सच्चाई जो हमारे सामने गलत रूप से पेश की गई!

 साइमन कमीशन पर एक सच्चाई जो हमारे सामने गलत रूप से पेश की गई!                                            भारत में आज तक ये ही पढ़ाया गया था, कि गांधी ने साइमन कमीशन का विरोध किया!  लेकिन ये नहीं पढ़ाया जाता कि तीन शख्स थे जिन्होंने साइमन कमीशन का स्वागत किया!   इन तीनो शख्सो के नाम निम्न है - 1- सर छोटूराम जी, जो पंजाब से थे 2- एससी से डॉक्टर बाबा सहाब अम्बेडकर जी, जो महाराष्ट्र से थे! 3- ओबीसी से शिव दयाल चौरसिया जी, जो यूपी से थे!    अब सवाल ये उठता है कि गांधी ने साइमन का विरोध क्यों किया?  क्योंकि 1917 में अंग्रेजो ने एक एक कमेटी का गठन किया था, जिसका नाम था साउथ बरो कमिशन!  जो कि भारत के शूद्र अति शूद्र अर्थात आज की भाषा में एससी एसटी और ओबीसी के लोगों की पहचान कर उन्हें हर क्षेत्र में अलग अलग प्रतिनिधित्व दिया जाए और हजारों सालों से वंचित इन 85% लोगों को हक अधिकार देने के लिए बनाया गया था!  उस समय ओबीसी की तरफ से शाहू महाराज ने भास्...

अशोक चक्र " का जब issue उठा तब।

 🇮🇳"अशोक चक्र " के लिए बाबासाहब ने बहुत Struggle किया है। .. " अशोक चक्र " का जब issue उठा तब। पूरी Parliament में हंगामा शुरू था। .. पूरी Parliament दनदना गयी थी।..   पहले राष्ट्रध्वज का कलर बनाने के लिए बाबासाहब ने " पेंगाली वेंकैय्या " को चुना था। ...पेंगाली वेंकैय्या को कलर के बारे में जनाकारी थी। ... उनका संवैधानिक चयन बाबासाहब ने किया था। ,.. पेंगाली वेंकैय्या ने ध्वज का कलर तो बनाया लेकिन वो कलर ऊपर निचे थे ... मतलब सफ़ेद रंग सबके ऊपर , फिर ऑरेंज और फिर हरा। ...  बाबासाहब ने सोचा , अगर अशोक चक्र हम रखे तो वो नीले रंग में होना चाहिए , और झंडे के बिच में होना चाहिए  ... ऑरेंज रंग पे " अशोक चक्र " इतना खुल के नहीं दिखेगा। ... बाबासाहब ने सोचा , अगर सफ़ेद रंग को बिच में रखा जाए जो की शांति का प्रतिक है , उसपर अशोक चक्र खुल के भी दिखेगा। .. और शांति के प्रतिक सफ़ेद रंग पे बुद्ध के शांति सन्देश का अशोक चक्र उसका मतलब बहुत गहरा होगा। ...  इसलिए बाबासाहब ने वो कलर ठीक से सेट किये। .. और सफ़ेद रंग बिच में रखा ताकि उसके ऊपर " अशोक चक्र  रखा जाए। ...

तीन शख्स थे जिन्होंने साइमन कमीशन का स्वागत किया था

 जो लोग साइमन कमीशन की सही जानकारी नही रखते और गांधी को हीरो समझते है वो सुनले समझले *साइमन कमीशन की हकीकत ।* *हमें आज तक यही  पढ़ाया गया था, कि गांधी ने साइमन कमीशन का विरोध किया था ,, लेकिन यह  नहीं पढ़ाया जाता कि तीन शख्स थे जिन्होंने साइमन कमीशन का स्वागत भी  किया था ।।* *इन तीन शख्स के नाम निम्न है -* *1- ओबीसी से चौधरी सर छोटूराम जी। जो पंजाब से थे।* *2- एससी से डॉक्टर बी आर अम्बेडकर। जो मध्यप्रदेश  से थे।* *3- ओबीसी शिव दयाल चौरसिया जो यूपी से थे।।* *अब सवाल ये उठता है कि गांधी ने साइमन का विरोध क्यों किया?*   *क्योंकि 1917 में अंग्रेजो ने एक एक कमेटी का गठन किया था,, जिसका नाम था साउथ बरो कमिशन,, जो कि भारत के शूद्र अति शूद्र अर्थात आज की भाषा में एससी एसटी और ओबीसी के लोगों की पहचान कर उन्हें हर क्षेत्र में अलग अलग प्रतिनिधित्व दिया जाए,, और हजारों सालों से वंचित इन 85% लोगों को हक अधिकार देने के लिए बनाया गया था,, उस समय ओबीसी की तरफ से शाहू महाराज ने भास्कर राव जाधव को,, और एससी एसटी की तरफ से डॉक्टर अम्बेडकर को इस कमीशन के समक्ष अपनी मांग रखने क...